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Blog: INDIA FIGHTS CASTEISM
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Saturday, 20 April 2013
Thursday, 18 April 2013
अपना भारत-अपना भारत - अपना भारत:Ramnawmi
Raj Kumar Sachan Hori has sent you a link to a blog:
राम नवमी शुभ हो
Blog: अपना भारत-अपना भारत - अपना भारत
Post: Ramnawmi
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राम नवमी शुभ हो
Blog: अपना भारत-अपना भारत - अपना भारत
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Wednesday, 17 April 2013
अपना भारत-अपना भारत - अपना भारत:Ramnawmi
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Fwd: HORI POET
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From: HORI POET <noreply@blogger.com>
Date: 17 June 2011 8:28:38 PM GMT+05:30
To: horirajkumar@gmail.com
Subject: HORI POET
HORI POET
HORI POET
![]()
Posted: 17 Jun 2011 05:11 AM PDT
होरी तब भी दीन था , होरी अब भी दीन |ग्राम वही , धनिया वही , पानी वही , ज़मीन ||%%%%%%%%%%%%%%%%%%%%%%%राज कुमार सचान 'होरी'
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Sunday, 14 April 2013
सामाजिक समानता हेतु -- दो दिवसीय उपवास
सामाजिक समानता हेतु -- दो दिवसीय उपवास
०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
स्थान --दारुल सफा, लखनऊ दिनांक -- 1 व 2 मई 2013
----------------------------------------------------------------------
महोदय ,
मज़दूर दिवस 1 मई को समर्पित--- विश्व भर में मानववाद , समानता की स्थापना के लिये ,ऊँच -नीच भावना,अस्प्रश्यता को समूल मिटाने के लिये तथा मानववाद की घोर विरोधी व्यवस्था --वर्ण और जाति को मिटाते हुये समरस समाज की स्थापना के लिये और सामाजिक शुद्धीकरण के लिये दो दिवसीय उपवास का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है ।
महात्मा गौतम बुद्ध , डाक्टर भीमराव अम्बेडकर , डाक्टर राम मनोहर लोहिया और महामना राम स्वरूप वर्मा आदि द्वारा पोषित सामाजिक निर्माण की आज और अधिक आवश्यकता है ।आपसे अनुरोध है कि इस कार्यक्रम में भाग लेते हुये मानववाद की स्थापना में अपना अमूल्य योगदान देने का कष्ट करें ।
दो दिवसीय उपवास कार्यक्रम का नेतृत्व श्री राज कुमार सचान "होरी" प्रसिद्ध कवि,लेखक, साहित्यकार ,समाजसेवी और प्रखर वक्ता , राष्ट्रीय संयोजक 'बदलता भारत' ( India Changes ) , राष्ट्रीय अध्यक्ष ' अर्जक साहित्य परिषद ' द्वारा किया जायेगा ।
सामूहिक उपवास कार्यक्रम में समान विचारधारा वाले व्यक्तियों और संगठनों द्वारा भाग लिया जायेगा । 1 मई की प्रात: 9 बजे से लगातार क्रमिक उपवास 2 मई की सायं 4 बजे तक किया जायेगा । दो दिन प्रथक प्रथक उपवास जत्थे बैठेंगे । कुछ व्यक्ति दो दिन का उपवास करेंगे।
यह उपवास व्यक्तिगत और सामाजिक शुद्धीकरण के लिये है । क्रपया अधिक से अधिक भाग ले कर सामाजिक जागरूकता को बढ़ायें और समरस समाज के रास्ते सशक्त राष्ट्र के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का कष्ट करें ।
निवेदकगण ---------
हरिपाल सिंह ,प्रदेश संयोजक ,
विश्राम चौधरी सह संयोजक
रिज़वान 'चंचल' सह संयोजक
INDIA CHANGES ( बदलता भारत )
तथा
अर्जक साहित्य परिषद,लखनऊ
प्रतिष्ठा में ------ समान विचारधर्मी संगठन ।
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०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
स्थान --दारुल सफा, लखनऊ दिनांक -- 1 व 2 मई 2013
----------------------------------------------------------------------
महोदय ,
मज़दूर दिवस 1 मई को समर्पित--- विश्व भर में मानववाद , समानता की स्थापना के लिये ,ऊँच -नीच भावना,अस्प्रश्यता को समूल मिटाने के लिये तथा मानववाद की घोर विरोधी व्यवस्था --वर्ण और जाति को मिटाते हुये समरस समाज की स्थापना के लिये और सामाजिक शुद्धीकरण के लिये दो दिवसीय उपवास का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है ।
महात्मा गौतम बुद्ध , डाक्टर भीमराव अम्बेडकर , डाक्टर राम मनोहर लोहिया और महामना राम स्वरूप वर्मा आदि द्वारा पोषित सामाजिक निर्माण की आज और अधिक आवश्यकता है ।आपसे अनुरोध है कि इस कार्यक्रम में भाग लेते हुये मानववाद की स्थापना में अपना अमूल्य योगदान देने का कष्ट करें ।
दो दिवसीय उपवास कार्यक्रम का नेतृत्व श्री राज कुमार सचान "होरी" प्रसिद्ध कवि,लेखक, साहित्यकार ,समाजसेवी और प्रखर वक्ता , राष्ट्रीय संयोजक 'बदलता भारत' ( India Changes ) , राष्ट्रीय अध्यक्ष ' अर्जक साहित्य परिषद ' द्वारा किया जायेगा ।
सामूहिक उपवास कार्यक्रम में समान विचारधारा वाले व्यक्तियों और संगठनों द्वारा भाग लिया जायेगा । 1 मई की प्रात: 9 बजे से लगातार क्रमिक उपवास 2 मई की सायं 4 बजे तक किया जायेगा । दो दिन प्रथक प्रथक उपवास जत्थे बैठेंगे । कुछ व्यक्ति दो दिन का उपवास करेंगे।
यह उपवास व्यक्तिगत और सामाजिक शुद्धीकरण के लिये है । क्रपया अधिक से अधिक भाग ले कर सामाजिक जागरूकता को बढ़ायें और समरस समाज के रास्ते सशक्त राष्ट्र के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का कष्ट करें ।
निवेदकगण ---------
हरिपाल सिंह ,प्रदेश संयोजक ,
विश्राम चौधरी सह संयोजक
रिज़वान 'चंचल' सह संयोजक
INDIA CHANGES ( बदलता भारत )
तथा
अर्जक साहित्य परिषद,लखनऊ
प्रतिष्ठा में ------ समान विचारधर्मी संगठन ।
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Friday, 12 April 2013
Fw: [KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH] 99% villagers...[kurmis]
---------- Forwarded message ----------
From: Rajkumar Hori
Date: Thursday, October 27, 2011
Subject: Fw: [KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH] 99% villagers...[kurmis]
To: Raj Sachan `HORI` <rajkumarsachanhori@gmail.com>
Cc: Kusum Sachan <kusumsachan@ymail.com>
----- Forwarded Message -----
Froam: AKHIL BHARTIYA KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH <kurmikshatriyamahaasangh@gmail.com>
To: rhori@ymail.com
Sent: Friday, 21 October 2011 11:55 AM
Subject: [KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH] 99% villagers...[kurmis]
--
Posted By AKHIL BHARTIYA KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH to KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH on 10/20/2011 11:25:00 PM
Froam: AKHIL BHARTIYA KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH <kurmikshatriyamahaasangh@gmail.com>
To: rhori@ymail.com
Sent: Friday, 21 October 2011 11:55 AM
Subject: [KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH] 99% villagers...[kurmis]
भारत के कुर्मी
*************
आज २०११ में भी देश में कुर्मी ,कुर्मिक्षत्रिय , पटेल आदि आदि लगभग १४०० उपजातियों में बटी यह जाति पूर्ण रूप से ग्रामीण है | ९९% जनसँख्या ग्रामों में रहती है , इसका शहरीकरण न होने के कारण इसमें अन्य जातियों की तुलना में बेरोजगारी और गरीबी अधिक है |
अचल संपत्ति से सदियों से जुड़े होने के कारण इसका चरित्र भी अचल है , आपस में लड़ना , एक दुसरे की बुराई करना ,कभी भी अपने लोगों की प्रशंसा न करना ....इसके जातीय लक्षण हैं |
ग्रामों में बसे होने के कारण यह जाति बौद्धिक क्रियाकलापों से भी दूर रही |साहित्य ,लेखन तथा अन्य कलाओं में इसका योगदान शून्य है |
धर्म ,दर्शन, इतिहास तथा अन्य विषयों में इस जाति के द्वारा पुस्तकें न के बराबर लिखी गयीं | साहित्य में भागीदारी लगभघ शून्य |
आईये महासंघ के शहरीकरण के अभियान को सब मिल कर सफल बनाएं |अपने अपने परिचितों को शहरों में तो बसायें ही ,अन्य लोगों को भी जागरूक करें |
"सत्ता और साहित्य में भागीदारी " महासंघ का आन्दोलन है ,आईये आगे बढ़ें इक्कीसवीं सदी को पटेलों की सदी बनायें |
पटेल राज कुमार सचान 'होरी'
--
Posted By AKHIL BHARTIYA KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH to KURMI KSHATRIYA MAHAA SANGH on 10/20/2011 11:25:00 PM
Tuesday, 9 April 2013
राम तेरे नाम
राम तेरे नाम
०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
(१)
राम एक आराध्य थाम गतिमय होना ।
रोम रोम में राम बीज प्रतिपल बोना ।।
जीवन स्वर्णिम होगा रे मन धीरज रख ,
राम नाम जप ,मनवा प्रातः शाम ।
००००००००००००००००००००००००००००००
(२)
आश और विश्वास स्वयं में राम सिखाता ।
अन्धकार में पथ प्रकाश का राम दिखाता ।।
चलता रह बस ,चलता रह रे मन अविचल,
निष्काम भाव मन करता रह तू काम ।
००००००००००००००००००००००००००००००००
(३)
कितने आये गये नाम ले तेरा बस ।
अपना भी तो कुछ पल का है डेरा बस ।।
बस तुम जाना नाम अमर कर इस उस जग,
निश्चिंत भाव से जाना फिर उस धाम ।
००००००००००००००००००००००००००००००००००
(४)
आना जाना नाट्य मन्च के दृश्य मनोहर ।
अपने अपने पाठ पूर्ण कर जाते उस घर ।।
बिना मोह भ्रम रे मन ,जीवन यापन कर ,
"होरी" जाना कह कह कह हे राम !
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
राज कुमार सचान "होरी"
कवि, साहित्यकार ,वक्ता
राष्ट्रीय संयोजक ----India changes( बदलता भारत )
email - rajkumarsachanhori@gmail.com , horiindiachanges@gmail.com , www.indiachanges.com ,http// horibadaltabharat.blogspot.com ,http//pateltimes.blogspot.com
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०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
(१)
राम एक आराध्य थाम गतिमय होना ।
रोम रोम में राम बीज प्रतिपल बोना ।।
जीवन स्वर्णिम होगा रे मन धीरज रख ,
राम नाम जप ,मनवा प्रातः शाम ।
००००००००००००००००००००००००००००००
(२)
आश और विश्वास स्वयं में राम सिखाता ।
अन्धकार में पथ प्रकाश का राम दिखाता ।।
चलता रह बस ,चलता रह रे मन अविचल,
निष्काम भाव मन करता रह तू काम ।
००००००००००००००००००००००००००००००००
(३)
कितने आये गये नाम ले तेरा बस ।
अपना भी तो कुछ पल का है डेरा बस ।।
बस तुम जाना नाम अमर कर इस उस जग,
निश्चिंत भाव से जाना फिर उस धाम ।
००००००००००००००००००००००००००००००००००
(४)
आना जाना नाट्य मन्च के दृश्य मनोहर ।
अपने अपने पाठ पूर्ण कर जाते उस घर ।।
बिना मोह भ्रम रे मन ,जीवन यापन कर ,
"होरी" जाना कह कह कह हे राम !
००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
राज कुमार सचान "होरी"
कवि, साहित्यकार ,वक्ता
राष्ट्रीय संयोजक ----India changes( बदलता भारत )
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Monday, 1 April 2013
गीत -"रूपसि ,रूप तुम्हारा००००००"
गीत -"रूपसि ,रूप तुम्हारा००००००"
०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
------ राज कुमार सचान "होरी"
-----------------------------------------------------------------------------
रूपसि, रूप तुम्हारा कोई नहीं निहारेगा ।
पीछे से कोई , हौले से नहीं पुकारेगा ।।
(1)
नव विधान के व्यूहपाश में , यौवन बिलखेगा ,
नारी का सौन्दर्य प्रशंसा के हित तरसेगा ।
कारागारों के कल्पित भय से भयभीत हुआ ,
चातक कोई कभी चाँद को नहीं निहारेगा ।
पीछे से कोई हौले से ०००००००००
--------------------------------------------------------------------------------
(2)
अब मजनू के लिये सदा ही लैला तरसेगी ,
बिना मेघ केबिजली भी अब किस पर तड़पेगी ?
पपिहा पिउ पिउ बोलेगा भी कैसे नये विधान में,
कोई फ़रहाद कभी सीरी को नहीं पुकारेगा ।
रूपसि, रूप तुम्हारा००००००००००००००
(3)
नैनों सैनों से न प्रेम संदेश लिखेंगे हम ,
प्यार मोहब्बत की दुनियाँ में कहाँ दिखेंगे हम ।
आदम -हौव्वा , मनु-सतरूपा डरे डरे होंगे ,
गीतकार कम्पायमान श्रंगार बिसारेगा ।
रूपसि, रूप तुम्हारा ००००००००००००००००००
(4)
अलंकार श्रंगार और रस रोयेंगे घर घर ,
अब बसंत पतझड़ सा होगा झर झर ग्राम नगर ।
सूरदास पुरुषों के आगे मन मारे सौन्दर्य ,
बुझा-बुझा सा प्यासा -प्यासा केश सवांरेगा ।
रूपसि, रूप तुम्हारा ००००००००००००००००००
(5)
व्यर्थ -व्यर्थ श्रंगार प्रसाधन ,सजना और संवरना ,
अलंकार नख शिख कपोल कटि भृकुटी और सिहरना ।
रूप निरर्थक , नहीं अगर , दीदार करे कोई ,
कामदेव के बिना तुम्हें रति ! कौन निखारेगा ?
रूपसि ,रूप तुम्हारा०००००००००००००००००००००
(6)
नव विधान में नव समाज अनजाना सा होगा ,
तापहीन निस्तेज़ प्रेम बचकाना सा होगा ।
प्रेम मोहब्बत शब्दकोश में ही रह जायेंगे ,
अब न प्रेम के तड़के से कोइ दाल बघारेगा ।
रूपसि , रूप तुम्हारा ०००००००००००००००००००००
(7)
ब्वायफ्रेंड तो होंगे लेकिन सहमें डरे हुये ,
"श्रंगार" नहीं, अब "शांत" और "करुणा"से भरे हुये ।
वैलेंटाइन डे अब होंगे अन्धे मूक बधिर ,
अब न ज्योतिषी जन्म कुंडली प्रेम विचारेगा ।
रूपसि , रूप तुम्हारा ०००००००००००००००००००
(8)
युवती देखेगी ,घूरेगी ,छेड़ेगी निश दिन ,
युवक नज़र नीची रख कर छिड़ छिड़ जाये दिन दिन ।
युवती बन दूल्हा छेडे़गी युवक बना दूल्हन ,
अब सुहाग की रात युवक ही सेज बुहारेगा ।
रूपसि , रूप तुम्हारा ०००००००००००००००००००००
(9)
नव विधान में वृद्ध नहीं अब आंखें सेंकेंगे ,
यूँ ही बैठे ढोर सदृश अब घर घर रेकेंगे ।
षोडषियां तो भूल जांयगे बुढ़ियों से भी डर डर,
बुडढा अपनी "बूढ़ जवानी" स्वयं सम्हारेगा ।
रूपसि , रूप तुम्हारा ०००००००००००००००००००
(10)
बिन देखे, घूरे,बोले ,बिन पीछा किये हुये ,
बिना सैन के प्रेम नैन के प्याले पिये हुये।
प्रेमांकुर कैसे फूटेंगे , प्रेमी हिये जिये ?
प्रेम बीज अब खेत खेत में कौन बिखारेगा ?
रूपसि , रूप तुम्हारा ००००००००००००००००००
(11)
पुलिस और नारी विमर्श से पुरुष रम्हायेगा,
स्वर्णिम पल कारागारों या कोर्ट बितायेगा ।
जीवन भर नारी से पीड़ित कुंठित लुटा पिटा,
नव विधान से क्षत विक्षत हो स्वर्ग सिधारेगा ।
रूपसि ,रूप तुम्हारा००००००००००००००००००००००००
(12)
नव विधान हे रूपसि ! तेरा , भस्मासुर होगा ,
जीवन में नव छन्द , ताल, लय और न सुर होगा ।
एक दिवस नारी वैरागी सी बन बिहरेगी ,
कोई पुरुष , नहीं नारी के निकट गुज़ारेगा ।
रूपसि , रूप तुम्हारा ००००००००००००००००००००००
-----------------------------------------------------------------------
176 अभय खंड प्रथम ,इंदिरापुरम ,ग़ाज़ियाबाद
rajkumarsachanhori@gmail.com
www.horionline.com
www.indiachanges.com
Mob.07599155999
टिप्पणी -- नारी शसक्तीकरण अधिनियम के लागू होने के पश्चात उससे पड़ने वाले प्रभावों पर वर्तमान और भविष्य के समाज का कटु , यथार्थ चित्रण करता हिन्दी का प्रथम गीत । इसके गायन ,प्रकाशन करने की स्वीकृति देता हूं । यह गीत भावी पीढिय़ों का झंडा गीत बनेगा ,ऐसा मेरा विश्वास है।
राज कुमार सचान "होरी"
दिनांक -25/03/2013
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०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००
------ राज कुमार सचान "होरी"
-----------------------------------------------------------------------------
रूपसि, रूप तुम्हारा कोई नहीं निहारेगा ।
पीछे से कोई , हौले से नहीं पुकारेगा ।।
(1)
नव विधान के व्यूहपाश में , यौवन बिलखेगा ,
नारी का सौन्दर्य प्रशंसा के हित तरसेगा ।
कारागारों के कल्पित भय से भयभीत हुआ ,
चातक कोई कभी चाँद को नहीं निहारेगा ।
पीछे से कोई हौले से ०००००००००
--------------------------------------------------------------------------------
(2)
अब मजनू के लिये सदा ही लैला तरसेगी ,
बिना मेघ केबिजली भी अब किस पर तड़पेगी ?
पपिहा पिउ पिउ बोलेगा भी कैसे नये विधान में,
कोई फ़रहाद कभी सीरी को नहीं पुकारेगा ।
रूपसि, रूप तुम्हारा००००००००००००००
(3)
नैनों सैनों से न प्रेम संदेश लिखेंगे हम ,
प्यार मोहब्बत की दुनियाँ में कहाँ दिखेंगे हम ।
आदम -हौव्वा , मनु-सतरूपा डरे डरे होंगे ,
गीतकार कम्पायमान श्रंगार बिसारेगा ।
रूपसि, रूप तुम्हारा ००००००००००००००००००
(4)
अलंकार श्रंगार और रस रोयेंगे घर घर ,
अब बसंत पतझड़ सा होगा झर झर ग्राम नगर ।
सूरदास पुरुषों के आगे मन मारे सौन्दर्य ,
बुझा-बुझा सा प्यासा -प्यासा केश सवांरेगा ।
रूपसि, रूप तुम्हारा ००००००००००००००००००
(5)
व्यर्थ -व्यर्थ श्रंगार प्रसाधन ,सजना और संवरना ,
अलंकार नख शिख कपोल कटि भृकुटी और सिहरना ।
रूप निरर्थक , नहीं अगर , दीदार करे कोई ,
कामदेव के बिना तुम्हें रति ! कौन निखारेगा ?
रूपसि ,रूप तुम्हारा०००००००००००००००००००००
(6)
नव विधान में नव समाज अनजाना सा होगा ,
तापहीन निस्तेज़ प्रेम बचकाना सा होगा ।
प्रेम मोहब्बत शब्दकोश में ही रह जायेंगे ,
अब न प्रेम के तड़के से कोइ दाल बघारेगा ।
रूपसि , रूप तुम्हारा ०००००००००००००००००००००
(7)
ब्वायफ्रेंड तो होंगे लेकिन सहमें डरे हुये ,
"श्रंगार" नहीं, अब "शांत" और "करुणा"से भरे हुये ।
वैलेंटाइन डे अब होंगे अन्धे मूक बधिर ,
अब न ज्योतिषी जन्म कुंडली प्रेम विचारेगा ।
रूपसि , रूप तुम्हारा ०००००००००००००००००००
(8)
युवती देखेगी ,घूरेगी ,छेड़ेगी निश दिन ,
युवक नज़र नीची रख कर छिड़ छिड़ जाये दिन दिन ।
युवती बन दूल्हा छेडे़गी युवक बना दूल्हन ,
अब सुहाग की रात युवक ही सेज बुहारेगा ।
रूपसि , रूप तुम्हारा ०००००००००००००००००००००
(9)
नव विधान में वृद्ध नहीं अब आंखें सेंकेंगे ,
यूँ ही बैठे ढोर सदृश अब घर घर रेकेंगे ।
षोडषियां तो भूल जांयगे बुढ़ियों से भी डर डर,
बुडढा अपनी "बूढ़ जवानी" स्वयं सम्हारेगा ।
रूपसि , रूप तुम्हारा ०००००००००००००००००००
(10)
बिन देखे, घूरे,बोले ,बिन पीछा किये हुये ,
बिना सैन के प्रेम नैन के प्याले पिये हुये।
प्रेमांकुर कैसे फूटेंगे , प्रेमी हिये जिये ?
प्रेम बीज अब खेत खेत में कौन बिखारेगा ?
रूपसि , रूप तुम्हारा ००००००००००००००००००
(11)
पुलिस और नारी विमर्श से पुरुष रम्हायेगा,
स्वर्णिम पल कारागारों या कोर्ट बितायेगा ।
जीवन भर नारी से पीड़ित कुंठित लुटा पिटा,
नव विधान से क्षत विक्षत हो स्वर्ग सिधारेगा ।
रूपसि ,रूप तुम्हारा००००००००००००००००००००००००
(12)
नव विधान हे रूपसि ! तेरा , भस्मासुर होगा ,
जीवन में नव छन्द , ताल, लय और न सुर होगा ।
एक दिवस नारी वैरागी सी बन बिहरेगी ,
कोई पुरुष , नहीं नारी के निकट गुज़ारेगा ।
रूपसि , रूप तुम्हारा ००००००००००००००००००००००
-----------------------------------------------------------------------
176 अभय खंड प्रथम ,इंदिरापुरम ,ग़ाज़ियाबाद
rajkumarsachanhori@gmail.com
www.horionline.com
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Mob.07599155999
टिप्पणी -- नारी शसक्तीकरण अधिनियम के लागू होने के पश्चात उससे पड़ने वाले प्रभावों पर वर्तमान और भविष्य के समाज का कटु , यथार्थ चित्रण करता हिन्दी का प्रथम गीत । इसके गायन ,प्रकाशन करने की स्वीकृति देता हूं । यह गीत भावी पीढिय़ों का झंडा गीत बनेगा ,ऐसा मेरा विश्वास है।
राज कुमार सचान "होरी"
दिनांक -25/03/2013
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Wednesday, 27 March 2013
Fwd: (2) ग्राम सरकार और नगर सरकार ़़़़ 73 वाँ और 74 वाँ संविधान संशोधन लागू कराना ।
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From: indiachanges2013 <indiachanges2013@gmail.com>
Date: 19 February 2013 9:28:26 PM GMT+05:30
To: Rajkumar sachan <horirajkumar@gmail.com>
Cc: "horiindiachanges@gmail.com" <horiindiachanges@gmail.com>, "indiachanges2012@gmail.com" <indiachanges2012@gmail.com>
Subject: Re: (2) ग्राम सरकार और नगर सरकार ़़़़ 73 वाँ और 74 वाँ संविधान संशोधन लागू कराना ।
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On Monday, December 31, 2012, Rajkumar sachan wrote:(2) ग्राम सरकार और नगर सरकार ़़़़ 73 वाँ और 74 वाँ संविधान संशोधन लागू कराना ।
भारत के जनमानस को ध्यान में रख अपनी जनता के सशक्तीकरण के लिये कभी देश की संसद ने बड़े उत्साह और राष्ट्र के प्रति पूर्ण निष्ठा की पवित्र भावना से गाँवों और नगरों को अपनी सरकार बनाने के लिये 73 वाँ और 74 वाँ संविधान संसोधन करते हुये देश कीजनता को है अधिकार दिया। था ।
आज स्थिति यह हैै इतने महत्वपूर्ण संविधान संसोधन हम अभी तक सम्पूर्ण देश में लागू नहीं कर पाये हैं । जिन प्रदेशोंने इन्हें लागू किया है वहाँ के परिणाम बड़े अच्छे , उत्साहवर्धक रहे हैं । परन्तु कुछ प्रदेश इन्हें अपने अधिकारों में हनन समझकर लागू नहीं कर रहे हैं । जिन प्रदेशों में इन्हें लागू नहीं किया गया उनकी स्थिति विकास की दृष्टि से असन्तोषजनक बनी हुयी है ।
देश की आधी जनता ग़रीबी रेखा के नीचे है ,विकास की दौड़ में अत्यन्त पीछे ।जनता की नियम क़ानून बनानें और संसाधनों के विकास में कोई भागीदारी नहीं है ।जबकि उक्त संसोधनों के पीछे जनता जनार्दन को सशक्त बनाने की भावना थी ।
इंडिया चेंजेज़ ( INDIA CHANGES ) ने इस प्रकरण में देश की नब्ज जानने की कोशिश की हैै़़़़ ़़़देश। के समस्त प्रधान , पंचायतों के प्रतिनिधि , ग्रामीण जनता 73 वाँ संसोधन लागू कराना चाहती है । इसके लिये समय समय पर आंदोलन भी होते रहते हैं । इसी तरह 74 वाँ संसोधन नगर निकायों के जनता के प्रतिनिधि - पार्षद और महापौर तथा नगरीय जनता लागू कराना चाहती है ।
आइए जनभावनाओं के अनुरूप देश की समस्त जनता की भलाई के लिये बिना किसी और विलम्ब के उक्त दोनों संसोधनों को पूर्ण निष्ठा से लागू करें। हम यह भी माँग करते हैं कि संसद एक संसोधन के द्वारा इन्हें स्वैच्छिक के स्थान पर अनिवार्य कर दे। जनता के इतने महत्वपूर्ण अधिकार राज्य सरकारों के भरोसे न छोड़े जाँय ।
जनता के द्वारा जनता की सरकार के लिये भले ही देशव्यापी आंदोलन क्यों न छेड़ना पड़े ।
इंडिया चेंजेज़ ( INDIA CHANGES )
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Fwd: 3/ जनसंख्या नियंत्रण
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From: indiachanges2013 <indiachanges2013@gmail.com>
Date: 19 February 2013 9:29:25 PM GMT+05:30
To: Rajkumar sachan <horirajkumar@gmail.com>
Cc: "indiachanges2012@gmail.com" <indiachanges2012@gmail.com>
Subject: Re: 3/ जनसंख्या नियंत्रण
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On Wednesday, January 2, 2013, Rajkumar sachan wrote:3/ जनसंख्या नियंत्रण
हमारे देश की जनसंख्या 1901 की जनगणना के अनुसार लगभग 23 करोड़ 80 लाख थी जिसमें वर्तमान पाकिस्तान और बांग्लादेश के भूभाग भी सम्मिलित थे । 2011 की जनगणना के आधार पर भारत वर्ष की जनसंख्या ही एक सौ पच्चीस करोड़ से अधिक है जो पाँच गुना से अधिक है जिसमें वर्तमान पाकिस्तान और बांग्लादेश की जन संख्या सम्मिलित नहीं है । भारत के वर्तमान भूभाग की तुलनात्मक जनसंख्या वृद्धि तो 7 गुना से भी अधिक होगी ।
भारतवर्ष ने स्वतंत्रता के बाद बहुत प्रगति की परन्तु सम्पूर्ण प्रगति जनसंख्या रूपी सुरसा के मुँह में समा गई । जहाँ सकल आय बढ़ी वहीं प्रति व्यक्ति आय में हम पूरे विश्व में पायदान पर हैं । ऐसा क्यों ? उत्तर एकदम स्पष्ट है भारी जनसंख्या वृद्धि । जनसंख्या वृद्ध विकास की नंबर एक शत्रु है ।
जनसंख्या वृद्धि जहाँ विकास की परम दुश्मन है वहीं यह अपराधों की जननी है । एक ऐसा वर्ग विकसित हो जाता है जिसको कोई काम न मिलने पर अपराध की ओर मुड़ जाता है ।उस वर्ग की शिक्षा दीक्षा कम रहती है, अभाव में बचपन बीतता है और वे दूसरों को सुखी संपन्न देखते हैं तभी उनके मन में बदले की भावना , ईर्श्या, विद्वेष तथा भांतिभांति के अपराध पनपने लगते हैं । आज पूरे देश में यही भयानक स्थिति हो रही है बलात्कार , हत्याओं आदि जघन्य अपराधों में दुनियाँ में सर्व श्रेष्ठ । जनसंख्या अधिक होने के कारण अपराधियों की भारी संख्या के सामने पुलिस बल अत्यन्त कम पड़ जाता है और असहाय नज़र आता है ।
माँग और पूर्ति में भारी अंतर से अभाव जन्म लेता है तो अभावों को दूर करने के लिये भी एक बहुत बड़ा वर्ग रिश्वत देने के लिये तैयार रहता है तो दूसरा वर्ग इसका लाभ उठा कर भ्रष्टाचार शुरू कर देता है । भारी जनसंख्या के कारण ही एक ऐसा वर्ग तैयार हो जाता है जो क़ानूनों से ऊपर उठ कर सारे संसाधनों पर कब्जा करने लगता है।
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